
वाशिंगटन । जेफरीज के ग्लोबल इक्विटीज हेड क्रिस्टोफर वुड का कहना है कि हाल के दिनों में आपने बाजार में जो गिरावट देखी है, वह तो शुरुआत भर है। आने वाले दिनों में इसमें भी बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। बाजार के जानकार मानते हैं कि शेयर बाजार में 22 साल पहले जैसे हालात बनते दिख रहे हैं। यानी वर्ष 2000 में जिस तरह मार्केट क्रैश हो गया था, आने वाले दिनों में बाजार में वैसी ही गिरावट देखने को मिल सकती है। क्रिस्टोफर वुड ने टेक शेयरों में आई इस गिरावट को वर्ष 2000 में ग्लोबल लेवल पर आई भारी गिरावट से जोड़ते हुए कहा है कि उस वक्त भी इसी तरह पहले डॉटकॉम शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी।
इसके कुछ ही महीनों बाद पूरा बाजार बैठ गया था। वुड ने हाल में वीकली न्यूजलेटर जारी किया, जिसमें कहा गया है कि आज की स्थिति को वर्ष 2000 में न्यूयॉर्क एक्सचेंज सहित दुनिया भर के बाजारों में आई भारी गिरावट से जोड़कर देखा जा सकता है। 22 साल पहले सबसे पहले डॉटकॉम कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए थे। बाकी बाजार उस दौरान अस्थिरता के साथ कारोबार कर रहा था। बाद में सभी ने देखा गया कि कैसे 6 महीने के भीतर एसएंउपी 500 इंडेक्स भी धड़ाम हो गए। उनका कहना है कि शेयर बाजारों में गिरावट का जो दौर आया है, अभी वह रुकने वाला नहीं है।
क्रिस्टोफर वुड ने भले बाजार में गिरावट की आशंका जताई हो, लेकिन बाजार के जानकार निराश नहीं हैं। उनका कहना है कि निवेशकों को इस समय आय में अच्छी ग्रोथ वाली मार्केट लीडर कंपनियों के साथ बने रहने की जरूरत है। पिछले एक-दो महीने से ऐसा देखा जा रहा है कि अमेरिका और भारत सहित दुनिया भर में टेक कंपनियों या नये जमाने की कंपनियों के शेयरों में लगातार बिकवाली हो रही है। पेटीएम, जोमैटो, कार ट्रेड और पीबी फिनटेक समेत भारत की नये जमाने की कई कंपनियों के शेयर अपने निम्नतम स्तर यानी सबसे निचले स्तर या उसके आसपास कारोबार कर रहे हैं।
इन कंपनियों में से कई कंपनियों के शेयर अपने आईपीओ इश्यू प्राइस से भी नीचे चले गए हैं। यह बेहद चिंता की बात है। अमेरिका के शेयर बाजार फेसबुक को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। कुछ सप्ताह पहले तक सोशल मीडिया साइट फेसबुक 1 लाख करोड़ डॉलर से अधिक की कंपनी थी। लेकिन अब इसकी मार्केट वैल्यू 565 अरब डॉलर रह गई है। विश्व की सबसे बड़ी कंपनियों की लिस्ट में यह खिसककर 11वें नंबर पर आ गई है।