मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शासन में मिले पद को जिम्मेदारी से निभाना और वचन देने के बाद उसे पूरा करना भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सीखने योग्य संदेश हैं। श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया और महाभारत के युद्ध में पांडवों का साथ दिया, लेकिन खुद सत्ता नहीं संभाली।

उन्होंने योग्य व्यक्ति को राजसिंहासन सौंपा। लोकतंत्र के सबसे बड़े नायक भगवान श्रीकृष्ण ही हैं। उनके जीवन से जिम्मेदारी, वचनबद्धता और मित्रता के आदर्श सीखने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री शनिवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में चतुर्थ राष्ट्रीय एचआर-सीएसआर सम्मेलन ‘अभ्युदय-2026’ के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने यशोदा माता के हाथ से ही माखन खाने का वचन दिया था और उसे निभाया। उनके जीवन की ऐसी घटनाएं बताती हैं कि वचन का पालन कितना महत्वपूर्ण है।

सुदामा, नंद बाबा और वसुदेव की मित्रता के उदाहरण दिए


मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा की मदद करके मित्रता का संदेश दिया। मित्रता के लिए अपनी परेशानी खुद उठा लेने और मित्र के परिवार की रक्षा करने का भाव भी उनके जीवन से सीखने योग्य है। उन्होंने नंद बाबा और वसुदेव की मित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि यशोदा माता ने दूसरे के बच्चे को अपना मानकर श्रीकृष्ण का पालन-पोषण किया। इससे भी समाज को प्रेरणा लेने की जरूरत है।

सीएम ने श्रीकृष्ण के नाग के फन पर नृत्य करने का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने कहा कि देवताओं ने मानवीय जीवन धारण कर जिन चुनौतियों का सामना किया और उनके समाधान के रास्ते निकाले, उनके बारे में जानना जरूरी है। इससे जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की सीख मिलती है।


श्रीराम वन गमन पथ और ओंकारेश्वर की जानकारी दी

संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने श्रीकृष्ण पाथेय और श्रीराम वन गमन पथ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने अपने वनवास का सबसे अधिक समय मध्य प्रदेश में बिताया था।

उन्होंने ओंकारेश्वर धाम में सरकार की ओर से विकसित व्यवस्थाओं के बारे में भी अतिथियों को बताया। सम्मेलन के संयोजक डॉ. विक्रांत सिंह तोमर ने स्वागत उद्बोधन दिया और आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की।


समग्र कल्याण के लिए सहयोग पर मंथन

सम्मेलन का विषय ‘अभ्युदय: समग्र कल्याण के लिए पर्यावरण-सामाजिक उत्तरदायित्व-सुशासन और सभ्यतागत ज्ञान का समन्वय’ है। इसमें इंडोनेशिया से पद्मश्री डॉ. अगुस इंद्र उदयाना, एस-व्यासा के कुलाधिपति पद्मश्री डॉ. एच.आर. नागेंद्र, श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के प्रतिनिधि श्रीराम तिवारी और अन्य अतिथि शामिल हुए।

आयोजन संस्कृति विभाग के श्रीकृष्ण पाथेय न्यास और यूनाइटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन द्वारा डॉ. विक्रांत सिंह तोमर के सहयोग से किया जा रहा है। सम्मेलन में देशभर से कॉर्पोरेट प्रतिनिधि, शिक्षाविद, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

इसका उद्देश्य उद्योग, सरकार, विश्वविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाकर कौशल, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में व्यावहारिक मॉडल विकसित करना है।