भोपाल के व्यापमं चौराहे पर रविवार को रीवा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में कांग्रेस नेता दिलीप तिवारी साथियों के साथ धरने पर बैठे। उन्होंने आशंका जताई कि प्लांट से पर्यावरण, जल और जमीन पर खतरा बढ़ेगा, जिसका असर लोगों की सेहत पर भी पड़ सकता है।
तिवारी ने कहा कि रीवा में पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। ऐसे में परमाणु प्लांट लगने से लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है। उन्होंने मांग की कि सरकार प्लांट के बजाय क्षेत्र में रोजगार के दूसरे साधन विकसित करे। इसके अलावा दिलीप तिवारी ने कहा कि वे अपनी जान देने को तैयार हैं, लेकिन अपनी जमीन और पानी को जहरीला नहीं होने देंगे।
छह दिनों से रीवा में चल रहा जल सत्याग्रह
दिलीप तिवारी ने कहा कि क्षेत्र में प्लांट के विरोध में पिछले 24 दिनों से लगातार आंदोलन चल रहा है। आंदोलनकारियों के समर्थन में विंध्य के लोग भोपाल में धरना दे रहे हैं। छह दिन से जल सत्याग्रह भी शुरू हुआ है, जिसमें वे खुद दो दिन शामिल रहे।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की मौत हो गई, लेकिन शासन-प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर देखने तक नहीं पहुंचा। मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार अनहोनी की आशंका जताई जा रही थी, इसके बावजूद रीवा प्रशासन सोया रहा।
उन्होंने कहा कि सरकार जब कोई अच्छी औद्योगिक या विकास योजना लाती है, तो उसे उद्योगपतियों और बड़े नेताओं की जमीन पर लगाया जाता है। वहीं, पर्यावरण, जल, जमीन और बच्चों के भविष्य के लिए नुकसानदायक होने की आशंका वाले प्लांट गरीब आदिवासियों की जमीन पर लगाए जा रहे हैं। सरकार इसे उपयोगी बता रही है, लेकिन रीवा जिले में पहले से ही पानी की कमी है, जमीनें बंजर हैं और किसान व युवा परेशान हैं। ऐसे में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगने से खतरा और बढ़ सकता है।
तिवारी ने गुढ़ में लगाए गए सोलर प्लांट का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार देने की बात कही गई थी, लेकिन एक भी युवा को रोजगार नहीं मिला। आज भी लोग रोजगार की तलाश में प्रदेश के दूसरे जिलों और शहरों में जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विंध्य में रोजगार के दूसरे अवसर विकसित किए जा सकते हैं, लेकिन परमाणु प्लांट स्वीकार नहीं है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
दिलीप तिवारी ने रीवा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यहां अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आए दिन स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के मामले सामने आते हैं। जिंदा व्यक्ति को मृत बता दिया जाता है, कुत्ते के काटने पर सांप के काटने का इंजेक्शन लगाए जाने जैसी घटनाएं होती हैं और कई गर्भवती महिलाओं की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जब सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था ठीक से नहीं संभाल पा रही है और अस्पतालों में केवल बिल्डिंग हैं, तो न्यूक्लियर पावर प्लांट लगने के बाद किसी खतरे की स्थिति में लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
विमला कोल की मौत पर जवाबदेही तय करने की मांग
जल सत्याग्रह के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की मौत को लेकर तिवारी ने कहा कि वे खुद 17 अक्टूबर को सत्याग्रह शुरू होने के दिन वहां मौजूद थे और लगातार दो दिन तक आंदोलन में शामिल रहे। उन्होंने महिला की मौत पर दुख जताते हुए श्रद्धांजलि दी। साथ ही आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन मामले को दबाने के लिए दूसरे बहाने बना रहा है।
सीएम हाउस में धरने की चेतावनी
जमीन और पानी बचाने की लड़ाई: आदिवासी अपनी जमीन, जल और बच्चों के भविष्य के लिए आंदोलन कर रहे हैं।
प्रशासन पर जिम्मेदारी का आरोप: तिवारी ने कहा कि आंदोलन में आगे किसी की जान गई तो शासन-प्रशासन जिम्मेदार होगा।
रीवा में आंदोलन जारी: जल सत्याग्रह के साथ आमरण अनशन भी चल रहा है। उमंग सिंघार भी रविवार को आंदोलन में शामिल हुए।
सीएम हाउस में धरने की चेतावनी: तिवारी ने कहा कि किसी और की जान गई तो वे मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर धरना देंगे।