नई दिल्ली। दीवाली का त्योहार रोशनी का पर्व होता है। इस त्योहार पर लोग दीये जलाते हैं और पटाखे फोड़कर अपनी खुशी जाहिर करते हैं। हालांकि, जरा सी लापरवाही इस खुशी के मौके पर ग्रहण लगा सकती है। पटाखों से होने वाले जलने के घाव सिर्फ ऊपरी नहीं होते। ये त्वचा के साथ-साथ नसों को भी डैमेज कर सकते हैं।
इसलिए अगर आप दीवाली पर पटाखे जला रहे हैं, तो बहुत ही सावधानी बरतें। साथ ही, अगर पटाखे जलाते समय हाथ जल जाए, तो फर्स्ट एड से जुड़ी किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ये भी जानना जरूरी है।
जलने की जगह सुन्न हो जाए, तो समझें बड़ा खतरा है
अगर जलने के बाद दर्द नहीं हो रहा है, तो ये अच्छी बात नहीं है, बल्कि खतरनाक संकेत है। गंभीर इंजरी के मामलों में नसें डैमेज हो जाती हैं, जिससे प्रभावित हिस्सा सुन्न हो जाता है। अगर त्वचा का रंग सफेद, चमड़ा काला नजर आए, तो ये डीप टिश्यू डैमेज के संकेत हैं, जिसमें तुरंत सर्जिकल जांच की जरूरत होती है।
हाथों में होने वाली बर्न इंजरी सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं। गंभीर इंजरी ठीक होने के बाद भी हाथों की उंगलियों को हमेशा के लिए कड़ा या मुड़ा हुआ बना सकते हैं। इससे लिखना, खाना या किसी भी चीज को पकड़ना मुश्किल हो जाता है।
पहले 20 मिनट में करें ये जरूरी काम
अगर पटाखे जलाते समय हाथ जल जाता है, तो शुरुआती कुछ मिनटों में कुछ जरूरी स्टेप्स उठाकर नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पटाखे वाली जगह से तुरंत दूर हो जाएं। अगर कपड़ों में आग लग जाए, तो रुकें, जमीन पर लेट जाएं और रोल करें। जले हुए हिस्से को 20 मिनट तक ठंडे बहते पानी के नीचे रखें। ध्यान रखें कि नॉर्मल पानी का इस्तेमाल करें। बर्फ का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें।
हाथ जलने पर सूजन आने से पहले अंगूठियां, घड़ी और दूसरी एक्सेसरीज उतार दें। अगर जलने वाले हिस्से पर कपड़ा चिपक गया है, तो खुद से खींचकर बाहर निकालने की कोशिश न करें।
किसी साफ, स्टेराइल और नॉन-स्टिक पट्टी का इस्तेमाल करें। भूलकर भी टूथपेस्ट, घी, हल्दी या दूसरे घरेलू नुस्खों को घाव पर न लगाएं।
अगर चोट गहरी है, ज्यादा जल गया है, सांस लेने में दिक्कत हो रही है या चेहरा, आंखें और हाथ प्रभावित हुए हैं, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना जरूरी है।
लंबे समय तक झेलना पड़ सकता है दर्द
पटाखे से हुए हादसे के प्रभाव काफी लंबे समय तक रह सकते हैं। गंंभीर रूप से जलने पर इन्फेक्शन, हमेशा रहने वाला निशान, जोड़ों की मूवमेंट सीमित होना और कई बार रिंकस्ट्रक्टिव सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। कुछ मामलों में स्किन ग्राफ्टिंग और लंबे समय तक चलने वाले रिहैबिलिटेशन की भी जरूरत पड़ सकती है।