इस्लामाबाद: पाकिस्तान की धार्मिक पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के अध्यक्ष फजलुर रहमान ने इमरान खान के समर्थन का ऐलान किया है। वह लगातार इमरान खान की रिहाई की वकालत कर रहे हैं। इसे पाकिस्तान की सियासत में बड़े उलटफेर के तौर पर देखा जा रहा है। यह वही मौलाना डीजल हैं, जिन्होंने इमरान खान को 'जायोनी एजेंट' (इजरायल का एजेंट) करार दिया था। वहीं, इमरान खान अपनी राजनीतिक रैलियों में फजलुर रहमान को 'मौलाना डीजल' कहकर उनका मजाक उड़ाते थे। वही मौलाना डीजल आज इमरान खान की आखिरी उम्मीद बन गए हैं, जो पिछले तीन साल से जेल में बंद हैं।
इमरान खान राजनीति में कैसे आए?
पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने बांग्लादेश के अखबार प्रथम आलो में लिखा, "मैं दोनों लोगों को 1988 से जानता हूं, जब पाकिस्तान के सैन्य तानाशाह जनरल जिया-उल-हक ने प्रधानमंत्री मुहम्मद खान जुनेजो को भ्रष्टाचार के आरोपों में हटा दिया था। पाकिस्तान मुस्लिम लीग के जुनेजो को 1985 के नॉन-पार्टी इलेक्शन के बाद जिया ने खुद अपॉइंट किया था। उस समय पंजाब के चीफ मिनिस्टर नवाज शरीफ ने अपनी पार्टी के प्रधानमंत्री का साथ देने के बजाय जिया का साथ दिया। जुनेजो को हटाने के बाद, जिया ने इमरान खान को नई सरकार में लाने का फैसला किया। इमरान खान ने 1987 में टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट ले लिया था, लेकिन जिया के कहने पर वापस आ गए। जनरल जिया-उल-हक का मानना था कि इमरान खान की मौजूदगी से उनकी खराब हुई रेप्युटेशन को ठीक करने में मदद मिलेगी।"
अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं इमरान खान
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। उन पर भ्रष्टाचार, हिंसा भड़काने और सरकारी गोपनीयता लीक करने (साइफर केस) जैसे 100 से अधिक कानूनी मामले दर्ज हैं। उन्हें 190 मिलियन पाउंड के अल-कादिर ट्रस्ट मामले सहित कई मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है। हालांकि, कुछ मामलों में उच्च न्यायालयों से उनकी सजा निलंबित भी हुई है, लेकिन अन्य मुकदमों के चलते वे लगातार जेल में ही हैं। ऐसी खबरें हैं कि जेल में सही से इलाज न मिलने के कारण इमरान खान की दाहिनी आंख से देखने की क्षमता प्रभावित हुई है। उनके स्वास्थ्य को लेकर हाल ही में काफी सस्पेंस बना हुआ था, जिसके बाद उनकी बहन ने जेल में उनसे मुलाकात की थी।
इमरान खान और मौलाना फजलुर रहमान के संबंध
इमरान खान और मौलाना फजलुर रहमान के संबंध उतार-चढ़ाव से भरे हुए हैं। कभी ये दोनों राजनेता एक दूसरे के कट्टर दुश्मन हुआ करते थे, लेकिन बदले हालात में वे दोस्त बन गए हैं। मौलाना फजलुर रहमान ने 2022 में इमरान खान सरकार के खिलाफ बनी पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) की अध्यक्षता भी की थी, जिसने 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से तत्कालीन प्रधान मंत्री इमरान खान को सत्ता से बाहर कर दिया था। आज वही मौलाना फजलुर रहमान पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। वह इमरान खान की जेल से रिहाई का समर्थन भी कर रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तानी सेना पर इमरान खान को जबरन जेल में रखने का आरोप लगाया है।
पीटीआई-सरकार के बीच मध्यस्थ बनें मौलाना फजलुर रहमान
मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान सरकार और इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के बीच गतिरोध को हल करने के लिए मध्यस्थता की भूमिका निभाने का ऑफर दिया है। 7 अक्टूबर को उमराह से लौटने के बाद मौलाना फजलुर रहमान से सीनेट में विपक्ष के नेताओं (पीटीआई) ने मुलाकात कर गतिरोध सुलझाने की अपील की। इसके अगले ही दिन सरकारी मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी मौलाना से मुलाकात कर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मौलाना फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को सलाह दी कि वे खैबर पख्तूनख्वा में बल प्रयोग, आपातकाल या गवर्नर शासन लगाने के बजाय बातचीत का रास्ता चुनें। मौलाना के दखल के बाद सरकार ने इन सख्त कदमों को अस्थायी रूप से टाल दिया था।