चीन में भारत के नए राजदूत ने पद संभालते ही क्यों किया तिब्बत का दौरा, तनाव के बीच कैसे बदल रहे पड़ोसियों के रिश्ते?

Updated on 13-06-2026 12:09 PM
बीजिंग: चीन में भारत के नए राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने अपना कार्यकाल संभालने के एक महीने के भीतर तिब्बत का अपना पहला दौरा किया है। दोराईस्वामी बीते गुरुवार 11 जून को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की राजधानी ल्हासा पहुंचे। चीनी भाषा बोलने में सक्षम दोराईस्वामी ने पिछले महीने ही बीजिंग में अपना पद संभाला था। भारतीय दूतावास ने बताया कि यह दौरान कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा पर जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए था। लेकिन यह दोनों एशियाई पड़ोसियों के बीच बेहतर होते रिश्तों का नया संकेत है।

मई में बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के प्रमुख का पद संभालने के बाद से दोराईस्वामी का चीन की राजधानी से बाहर पहला दौरा था। दोराईस्वामी को चीन की जिम्मेदारी ऐसे समय में दी गई है, जब दुनिया की दो सबसे अधिक आबादी रखने वाले दोनों पड़ोसी अपनी द्विपक्षीय संबंधों को फिर से बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं।

गलवान में झड़प के बाद रिश्तों में तनाव

हालांकि, यह किसी भारतीय राजदूत का पहला दौरा नहीं है। इस तरह के दौरे पहले भी हो चुके हैं, लेकिन सीमा पर तनाव के चलते इस दशक में ऐसी यात्राएं बहुत कम देखने को मिलीं। साल 2020 में गलवान घाटी में सैनिकों की हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते निचले स्तर पर पहुंच गए थे। संबंधों की सुधारने की कोशिश के तहत चीन ने पिछले साल पांच साल के बाद तिब्बत जाने का रास्ता फिर से खोल दिया।

दोराईस्वामी से पहले बीजिंग में भारतीय राजदूत प्रदीप कुमार रावत ने पिछले साल जून तिब्बत में आठ दिन बिताए थे और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं का जायजा लिया था। हालांकि, इस बार की यात्रा क्षेत्रीय भू-राजनीति की वजह से भी चर्चा में है। भारत और चीन ने इस साल लिपुलेख दर्रे से यात्रा को खोलने का फैसला किया है। इस क्षेत्र पर नेपाल अपना दावा करता है और घोषणा के बाद उसने औपचारिक विरोध दर्ज कराया था।

चीन और भारत के बीच बातचीत

भारतीय राजदूत का तिब्बत दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब बीजिंग और नई दिल्ली सीमा पर तनाव कम करने को लेकर बातचीत कर रहे हैं। दो हफ्ते पहले चीन और भारत ने बीजिंग में सीमा मामलों पर बातचीत और समन्वय के लिए द्विपक्षीय कार्यतंत्र के तहत बातचीत का नवीनतम दौर आयोजित किया था। चीन की तरफ से बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने सीमावर्ती इलाकों में लगातार शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रति समर्थन जताया है।

चीन और भारत एक दूसरे के साथ 3200 किमी लंबी सीमा साझा करते हैं, जिसे वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) कहा जाता है। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने सीमा के दोनों ओर बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी लाई है। इसी साल अप्रैल में बीजिंग ने भारत के पूर्वोत्तर में स्थित अरुणाचल प्रदेश में 23 और जगहों के नाम बदलकर चीनी और तिब्बती नाम रख दिए थे।

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