थॉड बना 'छेद वाली छतरी', ईरान हमलों ने खोली अमेरिकी डिफेंस सिस्टम की पोल, खाड़ी देशों के अरबों डॉलर बर्बाद?

Updated on 20-04-2026 01:54 PM
रियाद: अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी से ईरान में हमले शुरू किए। इसके बाद ईरान ने जवाबी हमलों में इजरायल और खाड़ी देशो में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे। ईरान के इन जवाब हमलों ने अमेरिका के एयर डिफेंस सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है। ईरान मिसाइलों ने जिस तरह से खाड़ी देशों में टारगेट हिट किए, उससे कई एक्सपर्ट अमेरिका के थाड जैसे एयर डिफेंस सिस्टम को छेद वाली छतरी करार दे रहे हैं। खाड़ी देशों में ये सवाल है कि क्या उन्होंने वाकई एक सही चीज पर अरबों डॉलर खर्च किए।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की सुरक्षा छतरी का एक अहम हिस्सा उसके मिसाइल डिफेंस सिस्टम रहे हैं। खासतौर से लॉकहीड मार्टिन का टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) बेहद सटीक माना जाता है, जिसके साथ पैट्रियट PAC-3 बैटरियां जुड़ी हैं। इनके जरिए बेहद मजबूत हवाई सुरक्षा का वादा अमेरिका ने खाड़ी देशों से किया था।

अमेरिका ने बताया था बेस्ट

अमेरिका ने खाड़ी देशों को इन सिस्टम्स को गोल्ड स्टैंडर्ड (सबसे बेहतरीन मानक) के तौर पर बेचा। ये ऊंची-ऊंचाई वाले इंटरसेप्टर थे, जो बैलिस्टिक मिसाइलों को उनके आखिरी चरण में ही मार गिराने में सक्षम थे। इनके साथ निचले स्तर के पैट्रियट सिस्टम लगाए गए थे, जो कम दूरी के खतरों और ड्रोन से निपटने के लिए थे।
खाड़ी के देशों ने इन सिस्टम पर तक अरबों डॉलर खर्च किए। खाड़ी देशों को भरोसा था कि ये सिस्टम उन मिसाइल खतरों को बेअसर कर देंगे, जो उन पर मंडरा रहे हैं। हालांकि 28 फरवरी से 8 अप्रैल तक चले युद्ध में ऐसा होता नहीं दिखा है। सऊदी अरब, यूएई से कुवैत, कतर तक ईरान की मिसाइलों ने सटीक निशाने लगाए हैं।

सऊदी अमेरिका का समझौता

बीते साल मई में सऊदी अरब और अमेरिका के बीच बड़ा सैन्य सहयोग समझौता हुआ। इसमें सऊदी अरब के लिए 142 अरब का हथियारों के पैकेज का ऐलान किया गया। इस पैकेज में THAAD सिस्टम्स, पैट्रियट PAC-3 के अपग्रेड और मिसाइलें, हवा से हवा में मार करने वाले आधुनिक हथियार, हथियारबंद ड्रोन्स, और गोला-बारूद का विशाल भंडार शामिल किया गया।
अमेरिका और सऊदी अरब के इस समझौते पर हालिया दिनों में सवाल उठने लगे, जब इन सिस्टम्स की ईरानी हमलों के खिलाफ परीक्षा हुई। ईरान के हमलों के खिलाफ खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी सुरक्षा कवच बुरी तरह से नाकाम हुए और यह पूरी दुनिया ने देखा कि अमेरिका के आर्मी बेस तक पर मिसाइलें गिरीं।

खाड़ी देशों ने देखी सच्चाई

अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरानी कार्रवाइयों ने खाड़ी देशों को यह 'सच्चाई' देखने को मजबूर कर दिया कि क्या ये हार्डवेयर सच में काम करते हैं, जिन पर उन्होंने अरबों डॉलर खर्च किए हैं। दुनिया ने देखा कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन ने सभी छह GCC देशों- बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, ओमान और यूएई को मुश्किल में डाला।
सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि जॉर्डन, सऊदी अरब और यूएई में THAAD के अहम AN/TPY-2 रडार पर सीधे हमले हुए, जिसे इस सिस्टम की 'आंखें' कहा जाता है। सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर THAAD रडार को रखने के लिए बने शेल्टर का मलबा बचा। जॉर्डन का मुवफ़्फक साल्टी एयर बेस निशाना बना। वहीं यूएई में अल रुवैस के पास THAAD बैटरी के ढांचों पर सीधे हमले हुए।

पैट्रिएट पर खड़े हुए सवाल

पैट्रिएट सिस्टम को आने वाले प्रोजेक्टाइल (हमलावर चीजों) की भारी संख्या से निपटने में मुश्किल हुई। ईरान के सस्ते ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों की बड़ी संख्या ने इसके सामने मुश्किल खड़ी की। ईरान के युद्ध ने साबित किया कि ये सिस्टम बड़े पैमाने पर होने वाले हमलों के सामने कितने सीमित हो जाते हैं।

ईरान युद्ध के बाद खाड़ी देशों, विशेष रूप से सऊदी अरब अपने समझौते पर मुश्किल में है। आज सच्चाई ये है कि जिन सिस्टम को एक अभेद्य ढाल के तौर पर बेचा गया। वह एक लीक होती हुई छतरी साबित हो रहे हैं। ऐसे में खाड़ी देशों में इस समय अमेरिकी सैन्य उपकरणों पर निर्भरता को लेकर बहस देखी जा रही है।

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