धर्म के लिए पाप और पाप के लिए धर्म करना महाअनाचार : मुनि संवेगरत्न सागर

Updated on 22-08-2026 11:49 AM

रायपुर। विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास की चातुर्मासिक प्रवचनमाला में शुक्रवार को मुनिसंवेगरत्न सागर जी म.सा. ने धर्म और आचरण को लेकर श्रावकों को सावधान किया। मुनिश्री ने कहा कि धर्म के लिए कभी पाप नहीं करना चाहिए और पाप के लिए कभी धर्म नहीं करना चाहिए। ऐसा करना महाअनाचार है। यदि जीव इन महाअनाचारों का सेवन करता है तो वह दुख, दुर्गति और पीड़ा के चक्रव्यूह में फंस जाता है। ये अनाचार की भूमिका के अंतिम दो पड़ाव हैं।

उन्होंने कहा कि मन के चौकीदार बनो और उस पर हमेशा चौकसी रखो। मन पर सावधानी रही तो जीवन सद्गति की ओर बढ़ेगा, लेकिन मन को खुला छोड़ दिया तो दुख, दुर्गति और पीड़ा का सर्जन होगा। मन में अनाचार के विचार प्रवेश न करें, इसके लिए सदैव जागृत रहना जरूरी है। 

मोक्ष लक्ष्य हो तो बदल जाता है ध्यान 

मुनिश्री ने कहा कि जिसका लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है, उसके जीवन में कुदर्शन ध्यान के स्थान पर सुदर्शन ध्यान, अनाचार ध्यान के स्थान पर आचार ध्यान और अज्ञान ध्यान के स्थान पर ज्ञान ध्यान प्रवेश करता है। व्यक्ति व्यवहार में छोटी-छोटी बातों को लेकर सावधान रहता है, लेकिन आत्मा के प्रति उतनी ही सावधानी नहीं रखता। आत्मकल्याण के लिए इस दृष्टि को बदलना जरूरी है।

परमात्मा के वचन जीवन को करते हैं मर्यादित
मुनिश्री ने कहा कि परमात्मा के वचनों का सानिध्य जिस जीव को मिल जाता है, वह अपने जीवन को मर्यादित कर लेता है। पूर्व में किए गए पाप बंधों की तप के माध्यम से निर्जरा करते हुए जीव आगे बढ़ता है। सम्यक ज्ञान का संपर्क होने पर जीवन सद्गति की ओर अग्रसर होता है। आत्मा को पतन से बचाने के लिए बुद्धि की मर्यादा में एक रेखा खींचना आवश्यक है, तभी जीवन में सही और गलत स्पष्ट हो सकेगा।

मृत्यु को महोत्सव मानने वाला नहीं भटकता 
मुनिश्री ने कहा कि जिस व्यक्ति के मन में मृत्यु को महोत्सव बनाने का भाव जाग जाता है, वह अनाचार ध्यान के मार्ग पर नहीं जाता। मन का मालिक हो या मन का गुलाम, अंततः हर जीव को इस संसार से जाना है। इसलिए जीवन रहते मन को साधना और आत्मा के कल्याण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

पात्र के लिए है देशना का दान 
मुनिश्री ने कहा कि परमात्मा ने देशना का व्यवहार और देशना के दान का मार्ग बताया है। देशना का दान भी पात्र व्यक्ति को ही देना चाहिए। बिना पात्रता के दी गई देशना कार्यकारी नहीं होती। धर्मसभा में पहुंचने वाले श्रद्धालु उत्तम कुल और जिन शासन की प्राप्ति जैसे सौभाग्य लेकर आए हैं। देव, गुरु और धर्म के सानिध्य में रहकर जो व्यक्ति अपना कल्याण करता है, वह दूसरों के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त करता है।



अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 05 September 2026
रायपुर। लंबे समय से नियमितीकरण का इंतजार कर रहे छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में लंबे समय से कार्यरत 3,630 कर्मचारियों को…
 05 September 2026
रायपुर।उफनती नदियों में फंसे लोगों और ग्रामीणों के सुरक्षित रेस्क्यू के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ प्रशासन, सेना और एसडीआरएफ (SDERF/SdRF) की टीमों ने जान जोखिम में डालकर…
 05 September 2026
रायपुर।डॉ. भीमराव ओपन थिएटर खेल मैदान, घंटाघर कोरबा में सर्व यादव समाज द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित भव्य शोभायात्रा एवं रैली में मुख्य अतिथि के तौर पर…
 05 September 2026
रायपुर।वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों की सुरक्षा और अवैध शिकार पर रोक लगाने के लिए वन विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा…
 05 September 2026
रायपुर।प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को नई गति मिल रही है। इसी क्रम में रायगढ़…
 05 September 2026
जशपुरनगर। राज्य स्तरीय जनसंपर्क अधिकारियों एवं सोशल मीडिया समन्वयकों की समीक्षा बैठक का आयोजन रायपुर में किया गया। बैठक में विभिन्न जिलों से आए सोशल मीडिया समन्वयकों को सोशल मीडिया…
 05 September 2026
सूरजपुर। जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश में चौथा स्थान और छत्तीसगढ़ में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जल…
 05 September 2026
उत्तर बस्तर कांकेर। जिले के दुर्गूकोंदल विकासखंड के ग्राम सोनपाल के पास से बहने वाले नाले में पुल नहीं होने के कारण बरसात के मौसम में ग्रामीणों को होने वाली…
 05 September 2026
सूरजपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर 2026 को रायपुर स्थित राजभवन में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में सूरजपुर जिले के दो शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से…
Advt.