
अशोकनगर । रूस के हमले के बाद यूक्रन में फंसी शहर की बेटी ऋषिका खंतवाल आखिरकार गुरुवार को अपने घर अशोकनगर आ गई है। वह ट्रेन से बीना स्टेशन पर उतरी जहां से स्वजन उसे अपने साथ लेकर आए। ऋषिका सुबह 10 बजे अशोकनगर पहुंची सबसे पहले तार वाले बालाजी मंदिर में भगवान के दर्शन किए। फिर अपने घर पहुंची जहां मां एवं अन्य परिजन बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। घर के बाहर रंगोली सजी थी। मां ने फूल माला पहनाकर बेटी की आरती उतारकर स्वागत किया। उसे देखते ही मां की आंखों से आंसू छलक पड़े और उन्होंने प्यार से उसे गले लगा लिया।
मालूम हो, कि शहर की दुबे कालोनी में रहने वाले शिक्षा विभाग के एडीपीसी अनिल खंतवाल की बेटी ऋषिका यूक्रन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। रूस द्वारा किए गए हमले के बाद ऋषिका भी भारत वापस आने के लिए प्रयासरत थी। 1 मार्च को वह रोमानिया से मुंबई पहुंच गई थी। यहां रहने वाले अपने भाई के पास रुकी। बुधवार को वह ट्रेन से बीना के लिए रवाना हुई। गुरुवार को सुबह ऋषिका खंतवाल बीना पहुंच गई। यहां स्वजन उसे लेने के लिए पहुंचे। इसके बाद गुरुवार को सुबह 10:30 बजे वह अपने घर आ गई। ऋषिका ने बताया की वह विनिसिया नेशनल पिरोगोव मेडिकल यूनिवर्सिटी के होस्टल में थे। गुरुवार को अचानक से सायरन बजा और सभी को हॉस्टल के अंदर कर दिया गया। कुछ समय मिला, जिसमें खाने पीने की चीजें खरीदी। वहीं अंदर छुपी रहे, जहां से धमाकों की आवाज सुनी। अगले दिन भारत के अन्य साथियों के साथ बस में तिरंगा लगाकर रोमानिया के लिए निकल गए। लगभग 6 घंटे से अधिक समय तक का सफर बस में किया। इसी बीच प्रत्येक घंटे पर चेकिंग हुई। जिसमें भारत के तिरंगा होने की वजह से अंदर कोई बस के अंदर नहीं आया। लेकिन बाहर से ही पासपोर्ट चेक करके जाने दिया। बॉर्डर से 10 किलोमीटर दूर सभी स्टूडेंट्स को बस से उतार दिया। लगभग 10 किलोमीटर तक पैदल चले। बॉर्डर पार करने के लिए 10 घंटे से अधिक चेकिंग चली। वहां से बुखारेस्ट एयरपोर्ट के लिए बस से निकले। जिसमें लगभग 8 घंटे से अधिक समय तक सफर किया। वहां से फ्लाइट से मुंबई आए। जो लगभग 10 घंटे का सफर रहा। ऋषिका मुंबई में ही भाई के पास रुक गई। बुधवार को मुंबई से ट्रेन से अशोकनगर के लिए निकली। बीना रेलवे स्टेशन पर ऋषिका के पिता अनिल खंतवाल बेटी को लेने पहुंचे। फिर वे वहां से अशोकनगर आ गए।
घर वालों ने सजाई रंगोली:
ऋषिका खंतवाल के घर आने पर मोहल्ले के लोगों व स्वजन ने खूब स्वागत किया। घर के बाहर रंगोली सजाई गई। इसके अलावा बेटी की आरती भी उतारी। ऋषिका की मां ने अपनी बेटी को गले लगा लिया, तो खुशी से उनकी आंखें नम हो गईं। सकुशल घर आने पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। ऋषिका ने बताया कि जब यूक्रन से बस में सवार होकर बस में तिरंगा लगाकर चले तब एहसास हुआ कि हमारी कंट्री की पावर कितनी है। तिरंगा लगा होने की वजह से कहीं भी रोका नहीं गया। बल्कि कई जगह तो अपने देश वापस पहुंचाने में वहां के लोगों ने भारत का नाम सुनते ही सहयोग भी किया। ऋषिका ने पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, डॉक्टर केपी यादव और विधायक जजपाल सिंह जज्जी का आभार व्यक्त किया।