जेडी वेंस ने H-1B वीजा पर दिया अपने 'भारतीय ससुराल वालों' का उदाहरण, बोले- US में अमेरिकियों की तरह सोचें

Updated on 15-04-2026 01:03 PM
वॉशिंगटन: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने देश के H-1B वीजा सिस्टम पर बयान दिया है। उन्होंने इस प्रोग्राम में कमियों और धोखाधड़ी पर फिक्र जताई है। साथ ही यह भी माना है कि इस वीजा के जरिए अमेरिका आने वाले प्रवासियों ने देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दिया है। वेंस ने कहा कि यह वीजा सिस्टम तब सबसे अच्छा काम करता है, जब इसके लाभार्थी अमेरिकी पहचान और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हैं। यानी वह अपनी पुरानी पहचान से आगे निकलकर खुद को अमेरिकी मानते हैं।

जेडी वेंस ने कहा, 'एक तरफ H1-B सिस्टम में बहुत ज्यादा धोखाधड़ी होती है तो दूसरी ओर ऐसे लोग भी हैं, जो यहां आए और देश को समृद्ध बनाया। ऐसे अच्छे लोगों में मेरे ससुराल वाले भी शामिल हैं।' जेडी वेंस ने भारतीय मूल की अमेरिकी उषा से शादी की है। उषा वेंस के माता-पिता आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे, जो अमेरिका जाकर बस गए थे।

'अमेरिका में अमेरिका की सोचें'

जेडी वेंस ने वीजा कार्यक्रम को लेकर भारतीय मूल के एक अमेरिकी छात्र के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि यहां आने वाले लोगों का फर्ज बनता है कि वे अपने इस देश यानी अमेरिका के बारे में सोचें ना कि उस देश के बारे में जहां से वे आए हैं। ऐसे लोगों को अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए और खुद को अमेरिकन मानना चाहिए।

अमेरिका का H-1B वीजा प्रोग्राम खासतौर से भारतीयों के लिए अहम है। भारतीय बड़ी संख्या में इस वीजा का इस्तेमाल अमेरिका जाने और वहां काम पाने करने के लिए करते हैं। H-1B वीजा पाने वालों में करीब 80 फीसदी से ज्यादा लोग भारतीय या चीनी नागरिक (सबसे ज्यादा इंडियन) होते हैं। वीजा में युवा कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाती है।

वीजा पर ट्रंप का सख्त रुख

अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वीजा कार्यक्रमों पर सख्त रवैया अपनाया है। जेडी वेंसकी ओर से अक्सर अपनी सरकार के H-1B वीजा पर कड़े प्रतिबंध और सख्त इमिग्रेश नियमों का बचाव किया है। वेंस और ट्रंप प्रशासन के दूसरे अधिकारियों ने नियमों की सख्ती को देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जोड़ा है।

H-1B प्रोग्राम के दुरुपयोग को खतरा बताते हुए डोनाल्ड ने पिछले साल नए आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत H-1B वीजा पर 1,00,000 डॉलर का शुल्क लगाया गया था। पिछले साल दिसंबर से अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने H-1B और H-4 वीजा के लिए कड़ी स्क्रीनिंग शुरू की है। अब आवेदकों के सोशल मीडिया प्रोफाइल तक देखे जा रहे हैं।

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