लाल सागर की ओर बढ़ रहा फ्रांस का नौसैनिक बेड़ा, राफेल से लैस चार्ल्स डी गॉल भी शामिल, टेंशन में ईरान

Updated on 07-05-2026 11:41 AM
पेरिस: विमानवाहक पोत सहित फ्रांस का नौसेनिक बेड़ा स्वेज नहर के दक्षिण और लाल सागर की तरफ बढ़ रहा है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए फ्रांस-ब्रिटेन की संयुक्त योजना के तहत संभावित अभियान की तैयारी की जा सके। फ्रांसीसी सशस्त्र बलों ने बुधवार को यह जानकारी दी। फ्रांसीसी सेना ने एक बयान में कहा कि चार्ल्स डी गॉल विमानवाहक पोत समूह, जिसके साथ एक इतालवी और एक डच युद्धपोत भी है, दक्षिणी लाल सागर की ओर जा रहा है।

मैक्रों ने की थी तैनाती की घोषणा


परमाणु ऊर्जा से संचालित 'चार्ल्स डी गॉल' और उसके साथ चल रहे पोतों का दक्षिण की ओर बढ़ना पश्चिम एशिया में तैनाती का नवीनतम चरण है, जिसकी घोषणा फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तीन मार्च को एक टेलीविजन संबोधन में की थी। मैक्रों ने यह घोषणा ईरान द्वारा होर्मज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने से एक दिन पहले की थी।

होर्मुज के पास जाएगा फ्रांसीसी नौसैनिक बेड़ा


स्वेज नहर के दक्षिण में इस कदम से फ्रांस का एकमात्र विमानवाहक पोत फारस की खाड़ी के उस महत्वपूर्ण मार्ग के और करीब पहुंच गया है, जिसके जरिये दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल का व्यापार होता है। लेकिन इस मार्ग को ईरान ने मार्च की शुरुआत से ही वाणिज्यिक यातायात के लिए प्रभावी रूप से रोक दिया है।

होर्मुज गठबंधन का हिस्सा है फ्रांस


फ्रांसीसी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ के प्रवक्ता कर्नल गुइलौम वर्नेट ने 'एपी' को बताया, ''स्वेज के दक्षिण में जाना हमारे लिए नया है। भौगोलिक रूप से यह होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब है और इसलिए परिस्थितियां अनुकूल होते ही हमें तेजी से प्रतिक्रिया करने में सक्षम बनाएगा।'' वर्नेट ने कहा कि फ्रांस, ब्रिटेन और 50 से अधिक देशों द्वारा गठित व्यापक होर्मुज गठबंधन तब तक काम करना शुरू नहीं करेगा जब तक किसी भी अभियान के लिए पड़ोसी देशों की सहमति न मिल जाए।

होर्मुज को लेकर टेंशन में फ्रांस


उन्होंने कहा, ''आज होर्मुज जलडमरूमध्य खतरे के कारण ठप पड़ा है और बीमा प्रीमियम बहुत अधिक हैं। कोई भी जहाज अपनी यात्रा को खतरे में नहीं डालेगा, वह वहां नहीं जाएगा।" फ्रांसीसी अभियान रविवार को शुरू किए गए अमेरिकी एस्कॉर्ट मिशन 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' से अलग है, जिस पर पहले ही ईरान की ओर से विरोध जताया गया है और उसकी ओर से आठ अप्रैल के युद्धविराम को लेकर धमकियां दी गई हैं। वर्नेट ने कहा, ''यह अभियान अमेरिकी अभियान से अलग है।'' उन्होंने फ्रांसीसी-ब्रिटिश योजना को रक्षात्मक और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप बताया।

होर्मुज पर एक साथ ब्रिटेन और फ्रांस


मैक्रों और ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने 16 अप्रैल को पेरिस शिखर सम्मेलन में 50 से अधिक देशों की मेजबानी की, और 30 से अधिक देशों के सैन्य योजनाकारों ने 22-23 अप्रैल को ब्रिटेन में आयोजित एक सम्मेलन में परिचालन संबंधी विवरणों को अंतिम रूप दिया। वर्नेट ने कहा, ''योजना क्रियान्वित करने के लिए तैयार है।''

बाल्टिक सागर से लाल सागर पहुंचा फ्रांसीसी बेड़ा


फ्रांस द्वारा अभूतपूर्व बताए गए सैन्य अभियान के तहत तीन मार्च को चार्ल्स डी गॉल को बाल्टिक सागर से रवाना होने का आदेश दिया गया था। इस सैन्य अभियान में आठ फ्रिगेट और दो मिस्ट्रल श्रेणी के उभयचर हमलावर पोत भी शामिल हैं। विमानवाहक पोत के दक्षिण की ओर बढ़ने से फ्रांसीसी वायु सेना खाड़ी में प्रवेश किए बिना ही जलडमरूमध्य की सीमा में आ गई है। अमेरिकी नौसेना 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर रही है।

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