ईरानी लीडरशिप का सफाया फिर भी नहीं हो रहा तख्‍तापलट, 'आखिरी स्तंभ' क्या है जिसने थामी है सरकारी दीवार?

Updated on 07-04-2026 12:28 PM
तेहरान: सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के लोगों से देश की सत्ता अपने हाथों में लेने का आह्वान किया था। लेकिन पांच हफ्तों से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी ऐसा नहीं हो पाया है। अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरानी सरकार की टॉप लीडरशिप का सफाया हो चुका है लेकिन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शासन की आखिरी दीवार को मजबूती से थाम रखा है। कहा जा रहा है कि IRGC जब तक ताकतवर है तब तक ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं हो सकता।

IRGC के बारे में माना जाता है कि सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने वालों को ये बेरहमी से कुचल देता है। जनवरी महीने में ऐसा हो चुका है जब ईरानी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 3700 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतार दिया गया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान की सरकार को गिराने के लिए IRGC की दीवार को गिराना होगा। ईरान के 'राष्ट्रीय प्रतिरोध परिषद' के एक प्रवक्ता ने कहा कि "न तो तुष्टीकरण और न ही कोई विदेशी युद्ध ईरान के उस संकट को खत्म कर सकता है जिसने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है।"

IRGC ने ईरान में रोक रखा है सत्ता परिवर्तन

ईरान की 'राष्ट्रीय प्रतिरोध परिषद' ने कहा कि 'सवाल ये है कि एक ऐसी सत्ता को जो खुद को बनाए रखने के लिए किसी भी क्रूरता की हद तक जा सकती है उसे कैसे उखाड़ा जा सकता है?' उसने कहा कि 'ईरान अब स्थिति बनती दिख रही है कि देश अपना क्षेत्रीय प्रभाव खो रहा है और मौलवियों के पू्र्ण शासन वाली इस सत्ता को बस IRGC नाम के स्तंभ का ही सहारा बचा है।' उसने कहा कि 'मौलवियों के इस शासन से मुक्ति का एक ही तरीका है IRGC को पूरी तरह से खत्म कर देना।'
हथियारों से पूरी तरह लैस IRGC अपनी बेरहमी के लिए जाना जाता है। इसने बार बार प्रदर्शन को बेरहमी और क्रूरता से कुचला है। ब्रिटिश-ईरानी कार्यकर्ता हाले ब्लेक ने 'द सन' की एक रिपोर्ट में बताया है कि 'उस दिन से मेरे दोस्त अब भी लापता हैं और मैं जिन भी ईरानी परिवारों को जानती हूं उनमें से हर परिवार का कम से कम एक सदस्य मारा गया है।'
उन्होंने कहा कि 'यह दमन बहुत ही क्रूर था। इसके बाद लोग घरों से बाहर नहीं निकल पाए।' ईरान में इस वक्त जब अमेरिका और इजरायल के हमले हो रहे हैं IRGC ने प्रदर्शन को कुचलने के लिए सड़कों पर सैनिको को तैनात कर रखे हैं और उन्हें किसी भी प्रदर्शनकारी को गोली मारने का आदेश है। बड़े पैमानियां पर गिरफ्तारियां की गई हैं।

ईरान में कैसे दरकती जा रही है IRGC की दीवार?

तेहरान से आने वाली जानकारियों के मुताबिक IRGC के लड़ाके 24 घंटे सड़कों पर गश्त लगाते हैं। एक सूत्र ने कहा कि 'उन्हें पता है कि थोड़ी सी भी गुंजाइश मिलने पर लोग विद्रोह कर देंगे।' अमेरिका-इजरायल के हमलों में 12 हजार से ज्यादा IRGC के लड़ाकों की मौत की रिपोर्ट्स हैं। इस वजह से IRGC नये लड़ाकों की भर्ती भी कर रहा है लेकिन फिलहाल ये उतना आसान नहीं है।

ईरान के एक सूत्र ने कहा है कि 'IRGC कमजोर तो हो रहा है और उसके कई उच्च कमांडरों की मौत हो गई है।' ईरान में IRGC पर 12 साल के बच्चों को भर्ती करने के भी आरोप लगे हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब एक 12 साल के बच्चे की मौत हो गई जिसे IRGC के कमांडर बना रखा था।
मौजूदा स्थिति ये है कि पड़ोसी देश इराक से शिया कट्टरपंथी मिलिशिया ईरान में घुस रहे हैं ताकि वे अपने उन IRGC आकाओं की मदद कर सकें जो इस वक्त बुरी तरह से घिरे हुए हैं और बिखरते जा रहे हैं। ईरानी शासन ने विद्रोह को रोकने के लिए डर का माहौल और भी बढ़ा दिया है। इसके तहत आलोचकों को चुप कराने के लिए उसने क्रूरतापूर्ण तरीके से लोगों को मौत के घाट उतारने का सिलसिला शुरू कर दिया है। ईरान के एक विपक्षी समूह ने दावा किया है कि पिछले 48 घंटों में चार कार्यकर्ताओं को मौत की सजा दी गई है। NCRI ने बताया है कि इस दौरान 15 अन्य राजनीतिक कैदियों को भी मौत की सजा सुनाई गई है।

दहशत बढ़ाने के लिए विरोधियों को फांसी

  • रविवार को ईरान सरकार ने गेजेल हेसार जेल में दो विरोधी नेताओं को फांसी दे दी।
  • जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए 19 वर्षीय मोहम्मदअमीन बिग्लारी और 30 वर्षीय शाहिन वाहेदपरस्त कालौर को फांसी दी गई है।
द सन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लोगों में गहरा आक्रोश है और इस शासन के ताबूत में आखिरी कील ठोकने के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं। United4Mahsa की सह-संस्थापक हालेह ने कहा कि कई लोग खुद को क्राउन प्रिंस कहने वाले रेजा पहलवीसे हरी झंडी मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ईरानियों को अमेरिकी मदद मिल चुकी है और लोग इंतजार कर रहे हैं। हालांकि UANI के पॉलिसी डायरेक्टर जेसन ब्रॉड्स्की ने चेतावनी दी है कि किसी भी तरह की क्रांति रातों-रात नहीं हो सकती यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी। उन्होंने कहा कि 'हम अभी उस मुकाम पर नहीं पहुंचे हैं। लेकिन जब हालात थोड़े शांत होंगे तो विरोध प्रदर्शन फिर से भड़क सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे पिछले साल 12 दिनों तक चले युद्ध के बाद शुरू हुआ था।'

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