कृषि अधिकारी और मैदानी अमला खेतों में पहुंचे : कृषि मंत्री

Updated on 04-09-2022 05:59 PM

कृषि एवं जल संसाधन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने महानदी मंत्रालय भवन में कृषि विभाग के आला अधिकारियों सहित जिले के अधिकारियों की संयुक्त बैठक लेकर खरीफ फसलों की स्थिति की समीक्षा की और आगामी रबी सीजन की तैयारियों के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। कृषि मंत्री श्री चौबे ने कहा कि अभी खेती-किसानी का पीक सीजन चल रहा है। अधिकारी कार्यालयों में बैठने के बजाए निरंतर फील्ड विजिट करें। किसानों से मिलें, खेतों में जाएं और फसलों की स्थिति को देखकर किसानों को आवश्यक सलाह दें। मंत्री श्री चौबे ने अधिकारियों को तकनीकी प्रशिक्षण नियमित रूप से दिए जाने के भी निर्देश दिए। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह, संचालक कृषि डॉ. अयाज तंबोली, अपर संचालक श्री एस.सी. पदम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागों के संयुक्त संचालक एवं जिलों के उप संचालक कृषि उपस्थित थे।

मंत्री श्री चौबे ने अधिकारियों को खरीफ फसलों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने के साथ ही कृषकों को सामयिक सलाह देने की हिदायत दी। आगामी रबी सीजन की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अधिकारियों को खाद, बीज एवं कीटनाशक दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही उनकी गुणवत्ता का विशेष रूप से ध्यान रखने के निर्देश दिए। कृषि मंत्री श्री चौबे ने कहा कि वर्ष 2022-23 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स इयर के रूप में मनाया जा रहा है। राज्य में मिलेट मिशन संचालित है। राज्य में मिलेट्स उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कृषकों को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने के साथ ही उन्हें उच्च क्वालिटी का बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। कृषि मंत्री ने कहा कि मिलेट्स की मार्केटिंग की कोई समस्या नहीं है। राज्य में भी कोदो-कुटकी, रागी की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा रही है। उन्होंने कहा कि अरहर, मूंग, उड़द की भी खरीदी समर्थन मूल्य पर इस साल से की जानी है। इसके लिए भी उन्होंने अधिकारियों को मार्कफेड के समन्वय से आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रबी सीजन में भी खेती-किसानी के लिए किसानों को पर्याप्त कृषि ऋण सहजता से उपलब्ध हो सके, इसके लिए उन्होंने अपनी ओर से आवश्यक पहल करने की बात कही।    

बैठक में जानकारी दी गई कि आगामी रबी सीजन में राज्य में एक लाख 75 हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती स्पेशल प्रोग्राम के तहत की जाएगी। मंत्री श्री चौबे ने रबी सीजन में गेहूं और सरसों के रकबे में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ अधिकारियों को उतेरा फसल के रूप में तिवड़ा, मूंग, उड़द के रकबे में भी वृद्धि के लिए किसानों को आवश्यक मदद एवं मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए। बैठक में पीएम किसान सम्मान निधि के लंबित केवायसी के मामलों सहित राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत लगभग 12 हजार किसानों के बैंक खातों का मिलान और केवायसी अपडेटेशन का कार्य 7 सितम्बर तक पूरा कराने के निर्देश दिए।

बैठक में राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष रूप से चर्चा की गई। राज्य में वर्तमान में एक लाख 12 हजार 512 किसान जैविक खेती कर रहे हैं, जिसका रकबा एक लाख 46 हजार हेक्टेयर है। परम्परागत कृषि विकास योजना एवं जैविक खेती मिशन के अंतर्गत 62 हजार 208 हेक्टेयर रकबा जैविक खेती के लिए प्रमाणित है। भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति के तहत राज्य के 7 जिलों गरियाबंद, बलरामपुर, कोरबा, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, जगदलपुर, कांकेर एवं दतेवाड़ा जिले में 85 हजार हेक्टेयर में सुगन्धित धान, ब्लैक एवं ग्रीन राईस, दलहन एवं तिलहन की जैविक खेती की जाएगी। इसके लिए  लगभग 350 प्रशिक्षित लोगों की टीम किसानों को जैविक खेती की तकनीक की जानकारी देने के साथ ही उन्हें आवश्यक मदद करेगी। राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर अप्रोच के साथ-साथ फसल प्रदर्शन पर इनपुट सब्सिडी, जैविक बीज एवं जैविक आदान-प्रदान किया जाता है।

मंत्री श्री चौबे ने बैठक में राज्य के सरगुजा, बलरामपुर एवं सूरजपुर जिले में खरीफ फसलों की स्थिति को लेकर संबंधित जिलों के अधिकारियों से विशेष रूप से चर्चा की। अधिकारियों ने बताया कि सूरजपुर जिले के प्रतापपुर एवं बिहारपुर तहसील, बलरामपुर जिले के रामानुजंगज, राजपुर, दरिमा और लुण्ड्रा में बारिश में विलंब एवं कमी के चलते खरीफ की खेती प्रभावित हुई है। बीते पखवाड़े में बारिश होने के कारण फसलों की स्थिति सुधरी है, फिर इन क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित होगा। मंत्री श्री चौबे ने अधिकारियों को निरंतर इन इलाकों का दौरा कर किसानों को आवश्यक सलाह देने के निर्देश दिए।


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